Christian Articles and Literatureमसीही उल्लेख तथा साहित्य

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20/08/2026

परीक्षा में अपना ध्यान परमेश्वर पर रखें, परिस्थितियों पर नहीं!

हम जानते हैं कि सुख और दुख मनुष्य के जीवन का हिस्सा है फिर चाहे वह मसीही हो या गैर मसीही, परंतु कभी कभार हमारे जीवन में हमारी आंखों के बिल्कुल सामने विशाल चट्टान के समान ऐसी असंभव परिस्थिति आ जाती है जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की होती। ऐ...

20/08/2026

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मनुष्य की सबसे बेशकीमती चीजों में से एक उसके रिश्ते होते हैं। कुछ रिश्ते मनुष्य के जन्म लेते ही बन जाते हैं जैसे माता-पिता, भाई-बहन इत्यादि, और कुछ रिश्ते वह अपने जीवन के सफर में बनाता है जैसे दोस्त, पति, पत्नी इत्यादि। वह इन्हीं रिश्तो के...

20/08/2026

16:9 trial

हम जानते हैं कि सुख और दुख मनुष्य के जीवन का हिस्सा है फिर चाहे वह मसीही हो या गैर मसीही, परंतु कभी कभार हमारे जीवन में हमारी आंखों के बिल्कुल सामने विशाल चट्टान के समान ऐसी असंभव परिस्थिति आ जाती है जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की होती। ऐ...

20/08/2026

A-42 धर्म, परमेश्वर और मनुष्य का रिश्ता!

मनुष्य की सबसे बेशकीमती चीजों में से एक उसके रिश्ते होते हैं। कुछ रिश्ते मनुष्य के जन्म लेते ही बन जाते हैं जैसे माता-पिता, भाई-बहन इत्यादि, और कुछ रिश्ते वह अपने जीवन के सफर में बनाता है जैसे दोस्त, पति, पत्नी इत्यादि। वह इन्हीं रिश्तो के...

20/08/2026

A-41 परमेश्वर एक और जातियाँ अनेक क्यों?

क्या कभी आपने सोचा है कि अगर परमेश्वर एक है तो संसार में अलग-अलग रंग-रूप के लोग, अलग-अलग भाषाएँ और अलग-अलग धर्म क्यों है? इसका जवाब सिर्फ बाइबल में मिलता है जो परमेश्वर का वचन है। “सत्य” की एक विशेषता यह है कि सत्य कभी छिपता नहीं और उसका प्...

20/08/2026

A-40 आपकी आंखें कहां केंद्रित हैं?

हम जानते हैं कि सुख और दुख मनुष्य के जीवन का हिस्सा है फिर चाहे वह मसीही हो या गैर मसीही, परंतु कभी कभार हमारे जीवन में हमारी आंखों के बिल्कुल सामने विशाल चट्टान के समान ऐसी असंभव परिस्थिति आ जाती है जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की होती। ऐ...

20/08/2026

A-39 मसीहत या शोहरत!

सृष्टि की शुरुआत से ही यह देखा गया है कि मनुष्य अपने पापमय स्वभाव के कारण ताकत और ऊंचे पद के पीछे भागता आया है। आज भी संसार में ताकत और ऊंचे पद को ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है। परंतु परमेश्वर का वचन बाइबिल मनुष्य को नम्रता पूर्...

20/08/2026

A-38 शैतान की युक्तियां - आत्मिक युद्ध।

हम जानते हैं कि प्रभु यीशु मसीह को अपना एकमात्र उद्धारकर्ता स्वीकार करना एक मनुष्य के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला होता है परंतु सफल मसीही जीवन जीने के लिए प्रभु यीशु मसीह को उद्धारकर्ता स्वीकार करने के बाद अपने जीवन में उसकी इच्छाओं को पू...

20/08/2026

A-37 परमेश्वर केवल मन देखता है!

जब एक मनुष्य प्रभु यीशु मसीह को अपना एकमात्र उद्धारकर्ता स्वीकार करके अपने मसीही जीवन की शुरुआत करता है, तब वह पापमय संसार की शिक्षा का इनकार करके पवित्र शास्त्र बाइबल के वचनों के आधार पर अपना जीवन बिताने लगता है। मसीही जीवन के इस सफर में ए...

20/08/2026

A-36 आप किसकी भेड़ हैं? येशु या संसार ?

पवित्र आत्मा से सीखिए - संसार से नहीं l जब येशु की भेड़ संसार में खो जाती है तो वो सांसारिक भेड़ बन जाती है, फिर उसे अच्छे चरवाहे का शब्द सुनाई नहीं देता - https://www.youtube.com/watch?v=lL_O2Vfy0d0&t=158s

20/08/2026

A-34 गंभीर ढिटाई के पाप !

जब एक मनुष्य स्वयं को पापी मानकर प्रभु यीशु मसीह के बलिदान से मिलने वाली क्षमा को स्वीकार कर लेता है और पापों से अपना नाता तोड़ लेता है, तब उसके मसीही जीवन की शुरुआत हो जाती है। यह उसके जीवन का सबसे अहम फैसला होता है। फिर जैसे-जैसे वो मसीही...

20/08/2026

A-33 छोटे जीवन में बड़ी उपलब्धियां !

मनुष्य अपने जीवन में कामयाबी पाने के लिए बहुत सी योजनाएं बनाता है ताकि वह अपने जीवन को भरपूर आनंद और सुख विलास से जी सके। परंतु सच तो यह है कि कोई भी मनुष्य यह नहीं जानता कि अगले ही पल उसके साथ क्या होने वाला है। जीवन की इस भाग दौड़ में मनु...

20/08/2026

A-32 आपकी संगति अच्छी है या बुरी?

इस दुनिया में विभिन्न प्रकार के लोग होते हैं जिन्हें सामाजिक मापदंड के आधार पर अच्छे या बुरे चरित्र वाला कहा जाता है l परंतु सही मायनों में, पवित्र शास्त्र बाइबल के आधार पर चलना ही अच्छा चरित्र होता है क्योंकि जब एक मनुष्य अपने पापों से मन...

20/08/2026

A-31 परमेश्वर को सच्चे मन से कैसे ढूंढें?

जब एक मनुष्य अपने पापों से मन फिराकर सच्चे परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार कर लेता है तब उसके आत्मिक जीवन का नया सफर आरंभ हो जाता है। इस नए आत्मिक सफर में उस नए विश्वासी की सबसे पहली इच्छा यह होती है, कि जैसे उसने अपने...

20/08/2026

A-30 सकरा मार्ग या चौड़ा मार्ग?

पवित्र शास्त्र बाइबल हमें सिखाती है कि मनुष्य, जो परमेश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना है, आरम्भ में परमेश्वर के साथ संगति करता था, परंतु परमेश्वर की आज्ञा ना मानने के कारण मनुष्य ने पहला पाप किया और अपने पापमय स्वभाव के कारण वह परमेश्वर से दूर हो...

20/08/2026

A-29 क्या मांस खाना पाप है?

इसमें कोई संदेह की बात नहीं है कि दुनिया के सभी प्राणियों में से परमेश्वर ने मनुष्य को अपने ही स्वरूप में सबसे बुद्धिमान प्राणी बनाया है। सभी प्राणियों में से सिर्फ मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जो अपनी बुद्धि के कारण आपस में तर्क संवाद कर सकता ह...

20/08/2026

A-28 परमेश्वर की दीनता और नम्रता!

पवित्र शास्त्र बाइबल हमें सिखाती है कि आदि में परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप में बनाया। जाहिर है कि परमेश्वर ने मनुष्य में अपने कई अच्छे गुण जैसे नम्रता और दीनता भी डाले होंगे। परंतु मनुष्य ने परमेश्वर के खिलाफ पाप करके अपने अंदर क्रोध,...

20/08/2026

A-27 आपके लिए परमेश्वर की योजना!

परमेश्वर के सत्य वचन पवित्र शास्त्र बाइबल के आधार पर - जिस दिन से पहले मनुष्य आदम ने परमेश्वर की आज्ञा ना मानकर इस संसार का पहला पाप किया, उसी दिन से मनुष्य में पाप का स्वभाव आ गया जिसके कारण उसकी संगति परमेश्वर से टूट गई और वह परमेश्वर के...

20/08/2026

A-26 बच्चे और मंदबुध्दि कहाँ जाते हैं?

जब एक मनुष्य का सच्चे परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करके उद्धार हो जाता है, तब उसके जीवन में परमेश्वर का आनंद तो होता ही है लेकिन साथ में उसे अपने परिवार के उद्धार की चिंता भी सताती है। इस दौरान मसीहत के सफर में उसके मन में कई सवाल उत...

20/08/2026

A-25 स्वर्ग और नरक वास्तविक जगह है।

आज आधुनिक मनुष्य अपने पापमय स्वभाव के कारण, परमेश्वर के ज्ञान को तुच्छ समझकर अपने ज्ञान पर ज्यादा विश्वास करता है। आज ज्यादातर लोग स्वर्ग और नर्क जैसी वास्तविक जगह को काल्पनिक मानते हैं क्योंकि वे सच्चे परमेश्वर और उसके सच्चे वचन, पवित्र शा...

20/08/2026

A-24 आप येशु से छिप नहीं सकते।

जब एक मनुष्य एक मात्र सच्चे परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार कर लेता है तो उसके जीवन में उतार-चढ़ाव होना बहुत आम बात है, क्योंकि उसका जीवन पवित्र शास्त्र बाइबल में लिखे वचनों के आधार पर चलने लगता है, जो पापमय संसार की शि...

20/08/2026

A-23 सिर्फ यीशु ही मार्ग सत्य और जीवन है।

जब सृष्टि की शुरुआत में ही मनुष्य ने परमेश्वर की आज्ञा ना मानकर परमेश्वर से अपना संबंध तोड़ लिया, तब परमेश्वर ने अपने प्रेम के कारण मनुष्य से अपना संबंध दोबारा स्थापित करने के लिए एक मार्ग निकाला - जो था मनुष्य के पापों का दंड भुगतने के लिए...

20/08/2026

A-22 मसीहियों का उठा लिया जाना - रैपचर

पवित्र शास्त्र बाइबल परमेश्वर का ऐसा सत्य वचन है जो ना सिर्फ हमें भूतकाल और वर्तमान काल के बारे में, बल्कि हमें भविष्य में होने वाली आलौकिक घटनाओं के बारे में भी बताता है, जिनमें से एक है अंतिम समय में प्रभु यीशु मसीह के द्वारा सभी मसीहियों...

20/08/2026

A-21 बाइबिल में “किस्मत” कुछ नहीं।

मनुष्य का परमेश्वर से दूर होने का मतलब है परमेश्वर के ज्ञान से भी दूर होना, जिसका प्रमुख उदाहरण है पापमय संसार का “किस्मत” जैसे सिद्धांत पर विश्वास करना, जिसको मनुष्य परमेश्वर का विधान समझता है। यह ऐसा सिद्धांत है जो परमेश्वर को पक्षपाती बन...

20/08/2026

A-20 स्वर्ग का मार्ग - अनुग्रह या कर्म?

मनुष्य अच्छे कर्म क्यों करता है? क्या अच्छे कर्मों से हमारा और परमेश्वर का निजी संबंध बन पाता है? क्या हमारे अच्छे कर्म, बुरे कर्मों को ढक सकते हैं? दुनिया का हर एक धर्म, जो मनुष्यों के द्वारा बनाया गया है, यही सिखाता है कि स्वर्ग जाना या प...

20/08/2026

A-19 अन्यान्य भाषा का दान

पवित्र शास्त्र बाइबल हमें यह सिखाती है कि परमेश्वर कलीसिया की उन्नति के लिए मसीहियों को आत्मिक दान भी देता है l आरंभिक कलीसियाओं में “अन्य-अन्य भाषा” में बोलने का दान भी था जिसे “अन्यान्य भाषा” भी कहते हैं l जिसको ये दान मिलता था, वो ऐसी भा...

20/08/2026

A-18 यीशु कठिनाइयों में भी हमारे साथ है!

सुख और दुख मनुष्य के जीवन का हिस्सा है इसीलिए मनुष्य के जीवन में कठिनाइयों का आना आम बात है, फिर चाहे वह मसीही हो या गैर मसीही। लेकिन पवित्र शास्त्र बाइबल हमें यह सिखाती है कि एक मसीही के जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी यीशु मसीह हमेशा उसक...

20/08/2026

A-17 येशु सब रिश्तों से ऊपर है!

पवित्र शास्त्र बाइबल में लिखे हुए परमेश्वर के वचन ऐसा सत्य हैं जो दुनिया की कोई भी शिक्षा या धर्म नहीं सिखाते। जहां एक तरफ दुनिया की शिक्षा और ज्ञान मन को भाने वाली बातें करते हैं वहीं दूसरी तरफ बाइबल का उद्देश्य मनुष्य को सत्य का बोध कराना...

20/08/2026

A-16 जीवन में पवित्रता का अर्थ क्या है?

पवित्रता क्या होती है? पवित्र शास्त्र बाइबल के आधार पर पवित्रता एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें कोई पाप नहीं होता और ऐसी स्थिति परमेश्वर के अलावा किसी की नहीं हो सकती। इसीलिए प्रभु यीशु मसीह ने जो पवित्र है, मनुष्य रूप में आकर मनुष्य के उद्धार...

20/08/2026

A-15 हमारा सहायक पवित्र आत्मा !

मनुष्य की जिंदगी में काफी बार ऐसी परिस्थितियां आती है जहां उसे सहायता की जरूरत होती है, उस वक्त किसी के द्वारा सहायता पाकर वह बहुत आभारी हो जाता है और आनंद से भर जाता है। सोचिए कैसा होगा अगर मनुष्य के पास हमेशा उसकी मदद करने को एक सहायक उपस...

20/08/2026

A-14 धन या परमेश्वर में से एक को चुनें !

सृष्टिकर्ता महान परमेश्वर यीशु मसीह की तुलना इस दुनिया की किसी भी चीज से नहीं की जा सकती, लेकिन क्योंकि परमेश्वर जानता है कि मनुष्य इस पाप से भरी दुनिया में धन को बहुत अहमियत देता है, उसने पवित्र शास्त्र बाइबल में अपनी तुलना धन से ही की। हा...

20/08/2026

A-13 अनंत जीवन / स्वर्ग कैसे पायें?

पवित्र शास्त्र बाइबल हमें अनंत जीवन के बारे में ऐसा सत्य बताती है जो दुनिया का और कोई शास्त्र नहीं बताता। जहाँ दुनिया का लगभग हर एक शास्त्र यह सिखाता है कि अनंत जीवन / स्वर्ग / मोक्ष – ये सब “अच्छे कर्मो” से कमाया जा सकता है, वहाँ बाइबल हमे...

20/08/2026

A-12 पति-पत्नी का रिश्ता अटूट हैl

इसमें कोई दो राय नहीं है कि पवित्र शास्त्र बाइबल में परमेश्वर का वचन सत्य है और दुनिया की शिक्षा के विपरीत है। बाइबल हमें पति और पत्नी के रिश्ते की ऐसी अहमियत सिखाती है जो दुनिया का और कोई शास्त्र या शिक्षा नहीं सिखाती। परमेश्वर ने दुनिया क...

20/08/2026

A-11 बच्चों को वचन में बड़ा करें !

बच्चे गीली मिट्टी के समान होते हैं। उन्हें जैसा आकार दिया जाए वे वैसा ही बन जाते हैं। पवित्र शास्त्र बाइबल हमें प्रोत्साहित करती है कि हम अपने बच्चों को शुरुआत से ही परमेश्वर का वचन सिखाएं, ताकि वे दुनिया के विनाशकारी प्रलोभनों में न फंस जा...

20/08/2026

A-10 वचन से दूर कभी न जाएँ !

पवित्र शास्त्र बाइबल के वचन मसीही जीवन की नींव है, जो एक मसीही को पापमय संसार से अलग करते हैं। जिस प्रकार मनुष्य की शारीरिक उन्नति के लिए भोजन जरूरी है उसी प्रकार मनुष्य की आत्मिक उन्नति के लिए बाइबल के वचन जरूरी है। इसलिए एक मसीही के लिए य...

20/08/2026

A-9 जवानी का सही इस्तेमाल करें !

मनुष्य के जीवन में युवावस्था एक महत्वपूर्ण अवस्था है। जीवन के इस समय में एक युवा या युवती साहसी, उत्सुक, रचनात्मक और शारीरिक रूप से मजबूत भी होते हैं। और यही वह समय है जब एक युवा व्यक्ति के लिए इस पापमय दुनिया के प्रलोभनों में पड़ना बहुत आस...

20/08/2026

A-8 सुसमाचार का प्रचार नित्य करें

आम तौर पर हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन में हम एक दूसरे के साथ समाचारों का आदान-प्रदान करते हैं। कभी वे समाचार खुशियां लाते हैं तो कभी दुख। पवित्र शास्त्र बाइबल के अनुसार मनुष्य जाति के उद्धार के लिए प्रभु यीशु मसीह का इस दुनिया में जन्म लेना,...

20/08/2026

A-7 सताव तो मसीही जीवन का हिस्सा है !

कई लोग अपने जीवन में अपने अपराधों के कारण सताव सहते हैं लेकिन सच्चाई के रास्ते पर चलकर सताव का सामना करना बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे लोग जो बाइबल के वचनों पर चलकर परमेश्वर यीशु मसीह के लिए सताव सहते हैं परमेश्वर उन्हें धन्य कहता है और...

20/08/2026

A-6 यहोवा का भय - बुध्दि है !

आज की आधुनिक दुनिया में बुद्धि को इस बात से मापा जाता है कि आदमी कितना सफल है। हांलाकि परमेश्वर का वचन बाइबल - दुनिया की शिक्षा से अलग है, और हमें यह सिखाता है कि बुद्धि की शुरुआत ही परमेश्वर के भय मानने से होती है। ऐसी बुद्धि की बात संसार...

20/08/2026

A-5 शरीर की अभिलाषाएं !

मनुष्य का जीवन हमेशा शारीरिक अभिलाषाओं से घिरा रहता है। इसलिए जरूरी है एक मसीही के लिए परमेश्वर के वचन के आधार पर अपना जीवन बिताना। जरूरी है जैसा पुत्र यीशु मसीह आज्ञाकारी था वैसे ही हम भी परमेश्वर के लिए आज्ञाकारी बने।मनुष्य की अभिलाएं, और...

20/08/2026

A-4 हमारा जीवन क्रूस पर होना चाहिए !

प्रभु यीशु मसीह द्वारा दिए गए क्रूस पर बलिदान की कोई तुलना नहीं की जा सकती। क्रूस का बलिदान हमें दर्शाता है कि कैसे परमेश्वर ने जगत के लोगों के लिए अपने आप को शून्य कर दिया। इसलिए जरूरी है कि यीशु मसीह के रास्ते पर चलने के लिए हम भी अपने जी...

20/08/2026

A-3 : प्रार्थना - PRAYER

मसीही जीवन का मुख्य आधार - प्रार्थना l सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना दर्शाती है एक मसीही का सच्चा विश्वास और येशु के प्रति समर्पित जीवन l अगर एक मसीही का जीवन निःस्वार्थ प्रार्थना पर निर्भर है, तो उसका मतलब है कि वो मसीही प्रभु की इच्छा में...

20/08/2026

A-2 : बुध्दि WISDOM

आप कितनी भी किताबें पढ़ लीजिये, फिर भी आपको वो बुध्दि नहीं मिल सकती जो बाइबिल से मिलती है l उसका कारण ये है कि बाकी सभी किताबें मनुष्यों द्वारा लिखी गई हैं, इसलिए उनमे केवल मनुष्य का ज्ञान और मनुष्य की समझ है l लेकिन बाइबिल परमेश्वर ने स्वयं...

20/08/2026

A-1 : विश्वास की परीक्षा कब होती है? TEST OF FAITH

अपना विश्वास कैसे बढायें? परमेश्वर पर सच्चा विश्वास क्या है? विश्वास के विषय में YouTube पर हमारे ये सभी video देखिये - https://www.youtube.com/watch?v=tD57z3McW84 https://www.youtube.com/watch?v=PD0Mn1S0MCg https://www.youtube.com/watch?v=...

Community 19/08/2026

विश्वास में साथ-साथ बढ़ना — Growing Together in Faith

विश्वास में साथ-साथ बढ़नामसीही आत्मिक वृद्धि पवित्र शास्त्र, प्रार्थना, प्रोत्साहन और सार्थक संगति के द्वारा फलती-फूलती है।संबंधित बाइबल अंशों को ध्यान से पढ़ें, समझ के लिए प्रार्थना करें और आज्ञाकारिता के एक व्यावहारिक कदम पर विचार करें। प...

Christian Living 18/08/2026

क्षमा की स्वतंत्रता — The Freedom of Forgiveness

क्षमा की स्वतंत्रताक्षमा उस अनुग्रह को प्रकट करती है जो हमें मिला है और हमारे हृदय को कटुता के बोझ से स्वतंत्र करती है।संबंधित बाइबल अंशों को ध्यान से पढ़ें, समझ के लिए प्रार्थना करें और आज्ञाकारिता के एक व्यावहारिक कदम पर विचार करें। परमेश...

Christian Living 17/08/2026

कठिन समय में विश्वास — Faith in Difficult Times

कठिन समय में विश्वासबाइबलीय विश्वास कठिनाइयों को अनदेखा नहीं करता, बल्कि हमारी आशा को परमेश्वर के चरित्र और प्रतिज्ञाओं में स्थिर करता है।संबंधित बाइबल अंशों को ध्यान से पढ़ें, समझ के लिए प्रार्थना करें और आज्ञाकारिता के एक व्यावहारिक कदम प...

Prayer 16/08/2026

दैनिक जीवन में प्रार्थना — Prayer in Everyday Life

दैनिक जीवन में प्रार्थनाप्रार्थना केवल एक दिनचर्या नहीं, बल्कि पूरे दिन परमेश्वर के साथ एक सच्चा और निरंतर संबंध है।संबंधित बाइबल अंशों को ध्यान से पढ़ें, समझ के लिए प्रार्थना करें और आज्ञाकारिता के एक व्यावहारिक कदम पर विचार करें। परमेश्वर...

Bible Study 15/08/2026

बाइबल अध्ययन कैसे शुरू करें — How to Begin Studying the Bible

बाइबल अध्ययन कैसे शुरू करेंएक सरल और प्रार्थनापूर्ण तरीका प्रत्येक पाठक को पवित्र शास्त्र को उसके संदर्भ में समझने और विश्वासयोग्यता से लागू करने में सहायता करता है।संबंधित बाइबल अंशों को ध्यान से पढ़ें, समझ के लिए प्रार्थना करें और आज्ञाका...

Foundations 14/08/2026

परमेश्वर के अनुग्रह को समझना — Understanding God’s Grace

परमेश्वर के अनुग्रह को समझनाअनुग्रह परमेश्वर का अनर्जित वरदान है जो उद्धार, स्वयं और दूसरों के प्रति हमारे दृष्टिकोण को बदलता है।संबंधित बाइबल अंशों को ध्यान से पढ़ें, समझ के लिए प्रार्थना करें और आज्ञाकारिता के एक व्यावहारिक कदम पर विचार क...