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मनुष्य की सबसे बेशकीमती चीजों में से एक उसके रिश्ते होते हैं। कुछ रिश्ते मनुष्य के जन्म लेते ही बन जाते हैं जैसे माता-पिता, भाई-बहन इत्यादि, और कुछ रिश्ते वह अपने जीवन के सफर में बनाता है जैसे दोस्त, पति, पत्नी इत्यादि। वह इन्हीं रिश्तो के साथ अपने सुख-दुःख बांटता है l
परंतु जब हम बात करते हैं सृष्टिकर्ता परमेश्वर की, जो इन सभी रिश्तो का आधार है, तब क्या मनुष्य यह जानता है कि परमेश्वर से भी रिश्ता बनाया जा सकता है? क्या मनुष्य उससे अपना रिश्ता बनाना जरूरी समझता है? क्या मनुष्य के बनाए हुए धर्म उसे परमेश्वर के साथ रिश्ता बनाने के बारे में कुछ सिखाते हैं? अगर हां तो क्या वह धर्म परमेश्वर के साथ रिश्ता बनाने में कामयाब हो सके हैं? नहीं!
सिर्फ बाइबल ही, जो परमेश्वर का दिया हुआ वचन है, हमें परमेश्वर के साथ रिश्ता बनाने के बारे में सही रीति से सिखाती है। बाइबल हमें सिखाती है कि संसार के आरंभ में मनुष्य का सबसे पहला रिश्ता परमेश्वर के साथ था। बाइबिल हमें सिखाती है कि मनुष्य का सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता अपने सृष्टिकर्ता परमेश्वर के साथ होना चाहिए। बाइबिल हमें यह भी सिखाती है कि कैसे मनुष्य ने अपने पापमय स्वभाव के कारण आरंभ में ही परमेश्वर से अपना रिश्ता तोड़ लिया था, और कैसे परमेश्वर ने अपने प्रेम के कारण मनुष्य से दोबारा रिश्ता स्थापित करने के लिए अपने इकलौते पुत्र यीशु मसीह का बलिदान दिया।
संसार का कोई भी मनुष्य जब अपने पापों से मन फिराकर प्रभु यीशु मसीह के बलिदान पर विश्वास करके, उसे अपना एकमात्र उद्धारकर्ता स्वीकार कर लेता है, तब वह सही मायनों में अपने धर्म से निकलकर परमेश्वर के साथ अपने रिश्ते का आनंद उठा पाता है। परमेश्वर और मनुष्य के रिश्ते के बारे में और जानने के लिए ये वीडियो देखें ।