A-19 अन्यान्य भाषा का दान

पवित्र शास्त्र बाइबल हमें यह सिखाती है कि परमेश्वर कलीसिया की उन्नति के लिए मसीहियों को आत्मिक दान भी देता है l आरंभिक कलीसियाओं में “अन्य-अन्य भाषा” में बोलने का दान भी था जिसे “अन्यान्य भाषा” भी कहते हैं l जिसको ये दान मिलता था, वो ऐसी भाषाओं में बोल सकता था जो उसने पहले कभी सीखी नहीं होती थी l ये दान आज कल के चर्चों में बोली जाने वाली अस्पष्ट, बेतुकी, अर्थहीन भाषा से बिलकुल भिन्न था क्योंकि अलग-अलग भाषाओं में बोलने का दान वो था जिसमे सुनने वालों को बोलने वाले की भाषा भली-भाँती समझ आ जाती थी l लेकिन ये एक “चिन्ह दान” था – SIGN GIFT – जो परमेश्वर के “दास” और उसके “सन्देश” की पुष्टि करने के लिए दिया जाता थाl लेकिन बाइबिल पूरी लिखी जाने के बाद अन्यान्य भाषा के दान की आवश्यकता समाप्त हो गई l  इसलिए ये बहुत संभव है कि आज के समय में यह दान किसी को नहीं मिलता, क्योंकि चर्च के इतिहास में पहली सदी के बाद से ही अन्यान्य भाषा का कोई ज़िक्र नहीं है l परंतु ये खेद जनक है कि गलत सिध्दांतों की वजह से आज भी कलीसियाओं में इस दान के नाम पर बेतुकी, अनजान, अर्थहीन भाषा बडबडाई जाती है जिससे मसीहियों में केवल अंधविश्वास बढ़ता है और उनकी कोई आत्मिक उन्नति नहीं होती l अन्यान्य भाषा के दान के बारे में अधिक विस्तार से जानने के लिए ये वीडिओ  देखें।

https://youtu.be/-ych3rPXes0

https://youtu.be/vZSp-2LOMNc