A-28 परमेश्वर की दीनता और नम्रता!

पवित्र शास्त्र बाइबल हमें सिखाती है कि आदि में परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप में बनाया। जाहिर है कि परमेश्वर ने मनुष्य में अपने कई अच्छे गुण जैसे नम्रता और दीनता भी डाले होंगे। परंतु मनुष्य ने परमेश्वर के खिलाफ पाप करके अपने अंदर क्रोध, घमंड, लालच और क्रूरता जैसे अन्य स्वभाव भी डाल लिए। अपने पापमय स्वभाव के कारण मनुष्य ने परमेश्वर की नम्रता और दीनता जैसे गुणों से भी नाता तोड़ लिया। आज जिस स्वभाव को लोग नम्रता और दीनता समझते हैं असल में वह सिर्फ एक ऊपरी परत है, मात्र एक दिखावा l उन्हें थोड़ा सा कुरेदो तो असलियत सामने आ जाती है – वही अहंकार, वही क्रोध, वही नफरत, और वही लालच l दुःख की बात तो ये है कि आज मसीहियों ने भी ये दिखावे की नम्रता और दीनता का चोला ओढ़ लिया है - जिसमें बाइबल के वचनों की सच्चाई से ज्यादा सिर्फ सांसारिक अच्छाई झलकती है। और इस दिखावे की अच्छाई को बनाए रखने के लिए आज का मसीही बाइबिल को एक तरफ रखकर संसार के साथ समझौता कर लेता है l सही मायनों में परमेश्वर की नम्रता, दीनता और सच्चाई - सिर्फ और सिर्फ पवित्र शास्त्र बाइबल के वचनों पर चलकर ही पाई जा सकती है। परमेश्वर की नम्रता और संसार की नम्रता में फरक जानने के लिए ये वीडियो देखें।

https://youtu.be/7r3rs3QtTBY

https://youtu.be/xU1Qpn0JqdU