A-31 परमेश्वर को सच्चे मन से कैसे ढूंढें?
जब एक मनुष्य अपने पापों से मन फिराकर सच्चे परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार कर लेता है तब उसके आत्मिक जीवन का नया सफर आरंभ हो जाता है। इस नए आत्मिक सफर में उस नए विश्वासी की सबसे पहली इच्छा यह होती है, कि जैसे उसने अपने पापों की क्षमा मांग कर प्रभु यीशु मसीह के बलिदान पर विश्वास करके उद्धार पाया वैसे ही उसके घर वाले और प्रियजन भी पाएं, इसलिए वह दिन रात उनके लिए प्रार्थना करने लगता है। आम तौर पर वह नया विश्वासी काफी समय तक प्रार्थना करने के बाद जब यह देखता है कि उसके घर वाले और प्रियजन प्रभु यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, तब वह बहुत निराश और उदास हो जाता है। इस कारण कई विश्वासी अपने परिवार वालों के अविश्वास का कारण नहीं समझ पाते। परंतु पवित्र शास्त्र बाइबल हमें स्पष्ट तौर पर इसका कारण बताती है, और वह है – एक अविश्वासी का सच्चे परमेश्वर को ढूंढने में कोई दिलचस्पी या इच्छा का ना होना। अब इसका कारण कुछ भी हो सकता है जैसे अपने ही धर्म पर अहंकार, या विज्ञान पर अधिक विश्वास इत्यादि। लेकिन बाइबल हमें सिखाती है कि इस संसार का कोई भी मनुष्य, भले ही वो किसी भी धर्म से हो या फिर नास्तिक हो, अगर वो सच्चे मन से परमेश्वर को ढूंढने की कोशिश करेगा तो परमेश्वर स्वयं को उस पर जरूर जाहिर करेगा। इस विषय को अच्छी तरह समझने के लिए ये सभी वीडिओ देखें।
https://youtu.be/Ma1L8J20QRg