A-34 गंभीर ढिटाई के पाप !

जब एक मनुष्य स्वयं को पापी मानकर प्रभु यीशु मसीह के बलिदान से मिलने वाली क्षमा को स्वीकार कर लेता है और पापों से अपना नाता तोड़ लेता है, तब उसके मसीही जीवन की शुरुआत हो जाती है। यह उसके जीवन का सबसे अहम  फैसला होता है। फिर जैसे-जैसे वो मसीही बाइबल के वचन के आधार पर अपना जीवन बिताने लगता है, वैसे वैसे वह परिपक्व मसीही बनता जाता है और जीवन में शांति और आनंद अनुभव करने लगता है। लेकिन मनुष्य में आदम से वंशानुगत मिले पाप का स्वभाव तो फिर भी होता है – जिसके कारण उससे कभी-कभी पाप हो जाना सामान्य बात है l

लेकिन स्थिति तब गंभीर होने लगती है जब मसीही अपने शरीर की लालसा को पूरी करने के लिए जानबूझकर उन्ही पापों को दोहराने लगता है l तब वे पाप उसकी आदत बनते जाते हैं और वे ढिटाई के पाप में परिवर्तित हो जाते हैं – मतलब वो ढीठ बनकर अपनी इच्छा से उन पापों को करने लगता है l यह स्थिति किसी भी मसीही के जीवन में आ सकती है फिर चाहे वह नया हो या परिपक्व l इस स्थिति को नियंत्रित करना एक मसीही के लिए बहुत अनिवार्य है नहीं तो वो परमेश्वर से दूर होता जाएगा और शैतान की युक्तियों का शिकार हो जाएगा l  अपने जीवन को आदतन और ढिठाई के पापों से बचाए रखने के लिए ये वीडियो देखें।

https://youtu.be/83eYG4WGymE

https://youtu.be/aQwZEKIQT2s