A-37 परमेश्वर केवल मन देखता है!

जब एक मनुष्य प्रभु यीशु मसीह को अपना एकमात्र उद्धारकर्ता स्वीकार करके अपने मसीही जीवन की शुरुआत करता है, तब वह पापमय संसार की शिक्षा का इनकार करके पवित्र शास्त्र बाइबल के वचनों के आधार पर अपना जीवन बिताने लगता है। मसीही जीवन के इस सफर में एक मसीही के मन में सच्चाई और सीधाई होने के कारण उसकी जीवन शैली सांसारिक लोगों से बहुत अलग होती है। सांसारिक लोग सच्चे परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह से दूर होने के कारण एक मसीही को कभी नहीं समझ पाते और अक्सर उसे तुच्छ मानते हैं। परंतु मसीहीयो की प्रेरणा का स्त्रोत सांसारिक लोग नहीं बल्कि परमेश्वर होना चाहिए।

एक मसीही को सांसारिक लोगों के सताव के कारण कभी भी निराश नहीं होना चाहिए और हमेशा अपना मन परमेश्वर के वचन पर ही केंद्रित करना चाहिए - क्योंकि वचन पर चलने वाले मसीहियों से ही परमेश्वर प्रसन्न होता है। परमेश्वर ऐसे मसीहियों के मन जानता है और उसी आधार पर उन्हें सम्मान भी देता है।