A-40 आपकी आंखें कहां केंद्रित हैं?

हम जानते हैं कि सुख और दुख मनुष्य के जीवन का हिस्सा है फिर चाहे वह मसीही हो या गैर मसीही, परंतु कभी कभार हमारे जीवन में हमारी आंखों के बिल्कुल सामने विशाल चट्टान के समान ऐसी असंभव परिस्थिति आ जाती है जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की होती।
ऐसी परिस्थिति में किसी भी इंसान का निराश होकर टूट जाना बहुत आम बात है क्योंकि उस इंसान की आंखें और ध्यान उसी परिस्थिति पर केंद्रित होता है।
परंतु बाइबल हमें सिखाती है कि एक मसीही की आंखें और ध्यान हमेशा परमेश्वर पर केंद्रित होनी चाहिए क्योंकि ऐसी कोई भी परिस्थिति नहीं है जो एकमात्र परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह के नियंत्रण से बाहर हो।
एक मसीही को चाहिए कि वह अपने रोजमर्रा के जीवन में बाइबल के वचनों को पढ़े, उनका अध्ययन करें और जीवन की हर एक छोटी बड़ी परिस्थिति के लिए प्रार्थना पूर्वक परमेश्वर के पास जाए।
ऐसा करने से एक मसीही की आंखें जीवन की कठिनाइयों पर नहीं परंतु परमेश्वर पर केंद्रित रहती हैं। 
परमेश्वर को अपने जीवन का केंद्र बनाने के विषय में यह वीडियो देखें। - 

https://youtu.be/7jpug2MI7XU